Tue. Apr 23rd, 2024

मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी भाटिया ने नरेंद्र सिंह और सिंधिया की ली क्लास, चुनाव कार्यालय के उद्धघाटन में आये थे मुरैना

मुरैना लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह सिकरवार के चुनावी कर्यालय के उद्धघाटन करने पहुंचे एआईसीसी सदस्य (AICC) और प्रदेश प्रभारी शिव भाटिया ने केंद्रीय मंत्री सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर पर जमकर हमला किया। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि सिंधिया जी इतने घिरे हुए हैं कि अपने क्षेत्र से ही निकल नहीं पा रहे हैं और नरेंद्र सिंह को उन्होंने चोर कहा डाला।

लोकतंत्र खतरे में है मिलकर बचाएंगे

समय कि जो लड़ाई है वह देश के लोकतंत्र को बचाने की है और कांग्रेस पार्टी ने जो बीड़ा उठाया है और जो इन मक्कार लोगों के खिलाफ मुहिम चालू की है। राहुल जी का संदेश जनता तक पहुंचाया गया है जिसमें पांच गारंटी और 25 उन्होंने अपने पॉइंट रखे हैं, उनको हम जनता के घर-घर तक पहुंचा देना चाहते हैं।

जिस तरह से झूठ और जुमले की सरकार 10 साल में हमें कुछ नहीं दे पाई। कर्जदारी, महंगाई, बेरोजगारी के बोझ के तले हमें दबाकर रख दिया। हमें उनसे बचना है और आगे 2024 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनाकर हमें अपने देश की सुरक्षा करनी है।

वायरल वीडियो को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पर साधा निशाना

शिव भाटिया ने पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री और वर्तमान में मप्र विधानसभा को उनके बेटे के वायरल पर घेरा, करोड़ों रुपये के घोटाले के मशीहा है। आरोप लगाते हुए कहा कि नरेंद्र सिंह तक कहा डाला चोर हैं। प्रचंड बहुमत से जीतेंगे यह सीट भाटिया ने कहा कि हमारी तैयारी अच्छी है और सिकरवार जी ईमानदार छवि के व्यक्ति हैं, हम निश्चित ही बड़े प्रचण्ड बहुतम से जीत हासिल करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी अपने झूठे वादे, गलत तरह से प्रचार और सरकारी तंत्र का गलत उपयोग करती है इसे जनता समझ चुकी है और इस बार जनता उन्हें पटकनी देगी।

अब मध्यप्रदेश में सरकारी अधिकारी बनने के लिए पढ़ना होगा जनजातीय विकास के बारे में, एमपीपीएससी ने अपने सिलेबस में किया बदलाव

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने जनवरी में नए सिलेबस को जारी किया था। इसके अनुसार मप्र में अब यदि अधिकारी बनना है तो फिर यहां के जनजातीय समाज को बेहतर तरीके से समझना होगा। मप्र की 21 प्रतिशत आबादी जनजातीय श्रेणी में आती है। जनजातीय संस्कृति,महापुरुष, साहित्य आदि को सिलेबस में शामिल किया गया है।

Mppsc प्री और मेन्स दोनों में ही जनजातीय समाज को महत्व

चूंकी प्रदेश की 21% जनसंख्या इस श्रेणी में आती है। इसलिए इसे विशेष ध्यान में रखते हुए नया सिलेबस बनाया गया है। स्टूडेंट्स सिलेबस में जनजातीय वर्ग की बेहतर जानकारी रखेंगे तो भविष्य में अधिकारी बनने पर उन्हें मैदान में काम करने में आसानी होगी।

आयोग ने जनवरी 2024 में नए सिलेबस को जारी किया था। इसके अनुसार मप्र में अब यदि अधिकारी बनना है तो फिर यहां के जनजातीय समाज को बेहतर तरीके से समझना होगा। एमपीएससी प्री और मेन्स दोनों में ही जनजातीय समाज को बहुत अधिक महत्व दिया गया है।

क्या जुड़ा नए सिलेबस में ?

नए सिलेबस में प्री में पूरा एक चैप्टर ही जनजातीय समाज पर है वहीं अन्य चैप्टर में जनजातीय विषयों को जोड़ा गया है। इसमें जनजाति समाज की बोलियां, प्रमुख व्यक्तित्व, विरासत, लोकसंस्कृत्ति, लोक साहित्य, भौगोलिक विस्तार, संवैधानिक प्रावधान, विशेष जनजातियां, साहित्य, स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका, लोक संस्कृति जैसे कई पहलू शामिल किए गए हैं।

वहीं मेन्स के पहले प्रश्नपत्र में इतिहास और भूगोल है। इसमें मप्र के जनजातीय नायकों के संघर्ष और इतिहास का अलग पूरा चैप्टर रखा गया है। इसी तरह विविध उनके संवैधानिक प्रावधान, उनकी भूमिका जैसे चैप्टर भी सिलेबस में जोड़े गए है।

कांग्रेस में नेताओं की पार्टी छोड़ने के चलते नहीं हो पा रहे उम्मीदवार घोषित, लोकसभा उम्मीदवार के लिए तरस कांग्रेस

लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024): पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, राजूखेड़ी जैसे दिग्गज नेताओं के कांग्रेस छोड़ने के चलते कांग्रेस हाई कमान टिकट फाइनल नहीं कर पा रही है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस को नेताओं में पार्टी छोड़ने की रेस सताने लगी है, इसीलिए कंग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं से सभी सम्भावित प्रत्याशियों से चर्चा करने कहा है।

2014 में हो चुकी है किरकिरी

2014 चुनाव में कांग्रेस से सीनियर आईएएस भागीरथी प्रसाद को उम्मीदवार घोषित किया था परन्तु उन्होंने अपना पाला बदल लिया था जिसके कारण कांग्रेस को भिंड में मुह की खानी पड़ी थी और इस बार भी पार्टी ने विशाल को इंदौर से उम्मीदवार बनाने की रणनीति थी पर विशाल ने पहले ही बीजेपी का दामन थाम लिया।

बीजेपी, टीएमसी, आप ने किए घोषित प्रत्याशी

चुनावों को लेकर बीजेपी ने अपनी पहली सूची में 195 उम्मीदवारों और टीएमसी ने 42 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, वहीं आप और कांग्रेस ने दिल्ली में सीट का बटवारा कर लिया है परंतु एमपी में नेताओं की इस भगदड़ ने कांग्रेस को शंका मे डाल दिया है। सोमवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होंनी है इससे पहले 29 सीटों के लिए सिंगल नाम तय करने कहा गया है। बैठक में लगभग सीटों पर नाम तय हो सकते हैं।

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाने वाले सुरेश पचोरी ने क्यों छोड़ा अपनी पार्टी का दामन ? जानिए बीजेपी में शामिल होने की बड़ी वजहें?

आगामी चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। एक के बाद एक कांग्रेस के कई नेताओं ने आज बीजेपी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस के सुरेश पचौरी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है।नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे।

कांग्रेस को फिर से झटका

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की मध्यप्रदेश से विदाई के तीसरे दिन कांग्रेस को फिर से एक बड़ा झटका लगा। दरअसल शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने भाजपा का दामन थाम लिया। साथ ही प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और धार के पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पिछले विधानसभा में इंदौर से कांग्रेस के इकलौते विधायक रहे संजय शुक्ला, पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पलिया, सतपाल पलिया और भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

कांग्रेस छोड़ने की क्या वजहें?

सुरेश पचौरी के नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे। यही कारण था कि हाल ही में जब राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा मध्यप्रदेश आई, तो वे उसमें शामिल नहीं हुए। इस दौरान उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने और बात करने तक नहीं गया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान उनके समर्थकों को नजरअंदाज किया गया। इससे भी वे नाराज चल रहे थे। वहीं, धार क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है।

भाजपा में शामिल होने के बाद क्या कहा?

भाजपा में शामिल होने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा, भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन रहा, तो कांग्रेस ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर इसे ठुकरा दिया। मुझे आघात पहुंचा। कांग्रेस को निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता नहीं थी। पचौरी ने कहा कि मैं स्वामी शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का शिष्य हूं। तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने भेजा कि शंकराचार्य जी से पूछकर आओ कि क्या करना है? उन्होंने कहा कि अयोध्या में शिलान्यास हो और मंदिर बने। फिर हम तत्कालीन गृह मंत्री के साथ गए और वहां शिलान्यास किया। वहां अशोक सिंघल भी थे। फिर अब निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता कहां से पड़ गई। राम मंदिर का ताला खोलना, शिलान्यास होना किस कार्यकाल में हुआ ये बोला जा सकता था।

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाते हैं पचोरी

मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि भाजपा में पूर्व सीएम कैलाश जोशी को ‘राजनीति का संत’ कहा जाता था। कांग्रेस की राजनीति में यह पदवी सुरेश पचौरी को मिली है। ऐसे व्यक्ति का कांग्रेस में स्थान नहीं है, इसलिए उनको लगा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जाकर कुछ काम करने की जरूरत है। इसलिए आज वह भाजपा में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और 1984 में राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। वह 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 1990, 1996 और 2002 में फिर से चुने गए।

एक केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने रक्षा, कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत और पेंशन और संसदीय मामले और पार्टी के जमीनी स्तर के संगठन कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे। पचौरी ने अपने राजनीतिक करियर में केवल दो बार चुनाव लड़ा। साल 1999 में, उन्होंने भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की उमा भारती को चुनौती दी और 1.6 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। इसके अलावा उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर से शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और दिवंगत सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने वाली प्रज्ञा ठाकुर का लोकसभा चुनाव से कटा टिकट, पीएम मोदी और पार्टी को लेकर कही ये बड़ी बात

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर बिगुल बजा दिया है। पार्टी ने दिल्ली में अपने लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों की पहली सूची कर दी है। जिसमें 195 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इनमें मप्र के भी 24 उम्मीदवार शामिल हैं। जिनमें विदिशा से शिवराज सिंह चौहान, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और भोपाल से आलोक शर्मा से दिग्गजों के भी नाम शामिल हैं। इस बार लोकसभा चुनाव से भोपाल की सासंद प्रज्ञा ठाकुर का नाम कट गया है। अब इसको लेकर उनकी प्रतिक्रिया सामने आयी है।

नमस्ते पीएम मोदी और पार्टी को लेकर कहा ये

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने सूची जारी होने के अगले दिन से एक टीवी न्यूज चैनल से बात की। जहां उन्होंने अपने टिकट कटने को लेकर कहा, ”बीजेपी सिद्धांतों पर चलने वाला संगठन है और इसमें किसी तरह का सवाल नहीं होता है।पार्टी ने आलोक शर्मा को टिकट दिया है और ये मुझे सहज स्वीकर है।” उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आलोक शर्मा काम करेंगे और हम सब मिलकर उन्हें विजयी बनाएंगे।

इसके अलावा प्रज्ञा ठाकुर से सवाल किया कि क्या बयानों की वजह से आपका टिकट तो नहीं कटा? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ”मेरे द्वारा दिए गए बयान पर मैंने पीएम मोदी से माफी मांग ली थी, मेरा उद्देश्य उनका मन दुखाना नहीं था और मैंने दुखाया भी नहीं।”साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा ” ⁠मेरा सत्य बोलना विरोधियों और कांग्रेस के लोगों को खटकता है, और मेरी आड़ लेकर वो मोदी जी पर प्रहार करते हैं। मैंने जो कहा वो सत्य कहा लेकिन मीडिया ने उसे विवादित बयान कहकर मुद्दे को हवा दी इसी कारण उस बयान को इतना बल मिला। जब साध्वी प्रज्ञा से पार्टी छोड़ने या फिर आगे के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि “⁠मेरा पार्टी छोड़ने का कोई विचार नहीं है” “संगठन जो जिम्मेदारी मुझे देगा, मैं उसे निभाऊंगी और जहाँ मेरी ज़रूरत होगी। मैं वहां उपलब्ध रहूंगी।

नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा था

माना जा रहा है कि सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को पीएम मोदी की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा है. दरअसल, उन्होंने संसद में बयान देते हुए नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा था, जिससे उन्हें विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. उनके इस बयान के बाद ही उन्हें रक्षा संबंधी कमेटी से हटा दिया गया था. पीएम मोदी ने भी साफ कर दिया था कि भले ही उन्होंने अपने इस बयान के लिए माफी मांग ली है, लेकिन वह कभी उनको माफ नहीं कर पाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाराजगी अब साफतौर पर देखी गई और भारी मतों से जीतने के बाद बावजूद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार नहीं बनाया गया।

कमलनाथ को लेकर दिग्विजय सिंह ने दिया बड़ा बयान, कहा – ईडी, आईटी और सीबीआई का दबाव है कमलनाथ पर

भाजपा में कमलनाथ के शामिल होने की अटकलों के बीच दिग्गविजय जी ने बोला की उनपर ईडी, आईटी, और सीबीआई का दवाब है।मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ के भाजपा में शामिल होने पर एक बड़ा बयान दिया है ।उन्होंने कहा, कमलनाथ जी जैसा व्यक्ति जिन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की है, उन्होंने हमेशा कांग्रेस के कदम से कदम मिलाया हैं। कमलनाथ जी को हम इंदिरा गांधी की तीसरी औलाद मानते हैं, भला वो कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी को छोर सकते हैं।

बीजेपी में जाना वाला चरित्र नहीं है कमलनाथ का

पूर्व मुख्यमंत्री जी का कहना है कि ईडी, सीबीआई और आईटी के दवाब से हमारे अलावा कमलनाथ जी को भी परेशानियां हो रही हैं। उनका चरित्र बिल्कुल भी ऐसा नही हैं। कमलनाथ के स्वयं भाजपा में शामिल होने की अटकलों का खंडन नहीं करने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने ज्वाइन नहीं किया यही उनका खंडन है।