Sat. Apr 13th, 2024

सिंहस्थ 2028 की तारीख हुई तय, शासन – प्रशासन ने शुरू की तैयारियां

उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी में हर 12 साल में लगने वाला अगला कुंभ 2028 में लगना है। इसके लिए सरकार और प्रशासन ने पूरी कार्य योजना बना ली गई है। कुंभ की तारीखों का ऐलान भी हो गया है। इसके बाद सीएम मोहन यादव ने प्लानिंग की समीक्षा बैठक ली।

सिंहस्थ 2028 में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का आकलन

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर बैठक की। सिंहस्थ 2028 (Simhatha 2028) को लेकर उज्जैन से राजधानी तक तैयारियां तेज हो गई हैं। अभी तक कार्ययोजना में 18 हजार 840 करोड़ की लागत से 523 कार्य प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश स्थायी प्रवृत्ति के कार्य हैं जिनका लाभ सिंहस्थ के बाद भी मिलेगा। प्रशासन इस बार सिंहस्थ 2028 में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का आकलन कर रहा है। यह आंकड़ा सिंहस्थ-16 से लगभग दो गुना है।

मुख्यमत्री ने दिए अहम निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में सिंहस्थ-2028 (Simhastha-2028) के आयोजन को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा, सिंहस्थ 2028 के लिए पशुपतिनाथ मंदसौर, खंडवा स्थित दादा धूनी वाले, भादवामाता, नलखेड़ा, ओंकारेश्वर आदि तक सुगम आवागमन और उनके अधोसंरचना सुधार को सम्मिलित करते हुए उज्जैन-इंदौर संभाग को समग्र धार्मिक-आध्यात्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाए। और उन्होंने निर्देश दिए कि शिप्रा के घाटों का विस्तार और पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था की जाए।

आगंतुकों की संख्या का अनुमान लगाकर उज्जैन पहुंचने वाले सभी मार्गों पर मूलभूत सुविधाओं सहित गेस्ट हाउस विकसित करें। उज्जैन से लगे ग्रामीण क्षेत्र में होमस्टे व्यवस्था को भी प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में उज्जैन से संभागायुक्त डॉ. संजय गोयल, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।अफसरों ने बताया कि आगामी सिंहस्थ में 9 अप्रैल से 8 मई की अवधि में 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान प्रस्तावित हैं। सिंहस्थ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

सीएम मोहन यादव और उनके पिता के बीच देखने को मिले भावुक पल, अयोध्या जाने के लिए पिता से मांगे पैसे

Ujjain: डॉ मोहन आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। प्रदेश के हर एक नागरिक की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है जिसकी वजह से उन्हें अपने लिए समय निकालने का भी समय नहीं मिलता है। प्रोटोकॉल में रहने की वजह से वे हर जगह जा भी नहीं सकते। लगातार लोगों से मुलाकात और जनता से मिलकर उनकी समस्याओं को हल करने के लिए वे लगातार दौरा करते रहते हैं। सीएम डॉ मोहन यादव भले ही आज प्रदेश के मुखिया हैं लेकिन आज भी वह अपने पिता से ही पैसे मांगते हैं।

दो दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुँचे थे सीएम

उज्जैन में दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट और विक्रमादित्य व्यापार मेले के आयोजन के अलावा अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान सीएम ने अपने कार्यक्रम में से थोड़ा सा समय निकला और अपने पिता पूनम चंद यादव से मुलाकात करने के लिए पहुंच गए।

उन्होंने अपने पिता से कहा कि उन्हें उज्जैन से भोपाल जाने के लिए पैसे चाहिए। यह देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों बचपन की तरह ही वह अपने पिता से पैसे मांग रहे हों। बेटे की मांग सुनकर पिता ने भी उनकी इच्छा पूरी करनी चाही और अपनी पोटली से कुछ पैसे निकालकर सीएम के हाथ में रख दिए।

पिता के साथ किया मजाक

पैसे देने के बाद मुख्यमंत्री थोड़ा मजा किया अंदाज में और पैसे मांगते हैं लेकिन पिता ने पैसा तुरंत पोटली में रख दिया। दोनों के बीच हुए इस नज़ारे को वहां मौजूद लोगों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। पिता से मुलाकात कर और उनसे पैसे लेने के बाद सीएम अपने पिता का आशीर्वाद ले कर वहां से अपने कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।