Sat. Apr 13th, 2024

लोकसभा चुनाव के पहले प्रदेश में हुई आईएएस अधिकारियों की बड़ सर्जरी, जानिए आपके क्षेत्र का कलेक्टर बदला क्या?

Bhopal: प्रशासिनिक अमले के शासन की रीढ़ माना जाता है और सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक ढंग से होता रहे इसीलिए अफसरों को सरकार तबादले, पदौन्नति करती रहती है। लोकसभा चुनावों को देखते हुए डॉ मोहन (Dr Mohan Yadav) के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आने के बाद से ही लगातार प्रशासिनिक सर्जरी कर रही है। कल भी सीएम डॉ मोहन यादव ने 5 आईपीएस और 2 आईएएस के ट्रांसफर कर दिए।

कार्यक्रम खत्म होते ही कर दिए ऑर्डर जारी

ग्वालियर में विजिया राजे सिंधिया एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में पहुँचे सीएम ने कार्यक्रम के खत्म होने के बाद ही ग्वालियर कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह को भोपाल अटैच कर दिया गया और उनके जगह पर 2011 बेच की आईएएस अधिकारी रूचिका चौहान को जिम्मेदारी दी है। वहीं एसपी राजेश सिंह को हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल अटैच किया गया है, उनके स्थान पर खरगोन एसपी धर्मवीर सिंह को ग्वालियर एसपी बनाकर भेजा गया।

दीपक को इंदौर तो सुदामा को ग्वालियर कमिश्नर बनाया

आईएएस सुदाम खाड़े को कमिश्नर ग्वालियर की जिम्मेदारी दी गई है, इंदौर कमिश्नर माल सिंह को मध्य प्रदेश शासन के सचिव पद पर पदस्थ किया गया है, उनके स्थान पर ग्वालियर के कमिश्नर दीपक सिंह को पदस्थ किया गया है। आनंद विभाग के प्रमुख सचिव को चंबल सम्भग का सहायक कमिश्नर की जिम्मेदारी दी है।

तीन दशक के बाद एमपी को मिली महिला मुख्य सचिव, जानिए कौन है नई मुख्य सचिव वीरा राणा

मध्यप्रदेश सरकार ने 1988 बेच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वीरा राणा को मध्यप्रदेश का मुख्य सचिव पद नियुक्त कर दिया है वे इस पद को मार्च 2024 तक सम्भालेंगी। राणा अब तक मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थी। इस पद पर निर्मला बुच के बाद वे दूसरी महिला होंगी। दो बार के कार्यकाल के विस्तार के बाद इक़बाल सिंह बैस 30 नवंबर 2023 के सेवानिवृत्त हो गए थे। जिसके बाद चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण वीरा राणा को अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया था।

पहली बार हुआ ऐसा?

मध्यप्रदेश के गठन के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि मतदान के दिन अलग चीफ सेक्रेटरी था और मतगणना के दिन अलग। वोटिंग के दिन इक़बाल सिंह बैस और 3 दिसम्बर को राणा ने प्रदेश के मुख्य सचिव पद कि कमान संभाल ली थी।

किन पदों पर रहा चुकी हैं

मुख्य सचिव बनने से पहले मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष, राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी, खेल और युवा कल्याण विभाग की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रशासन अकादमी में महानिदेशक, कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण विभागों के साथ मध्यप्रदेश के दो जिले जबलपुर और विदिशा जिले की कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन से रहा विवादों का नाता

2018 में तत्कालीन मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सरकार से अपने पीएस पद के के लिए एक महिला आईएएस की अनुसंशा की थी और वर्तमान सरकार ने वीरा राणा को इस पद पर नियुक्त कर दिया था। एक पखवाड़े काम करने के बाद ही उनकी राज्यपाल कॉफ़ी टेबल के प्रकाशन को लेकर अनबन हो गई थी जिसके बाद वे चाइल्ड केयर लीव पर चली गई थी जिसके बाद सरकार ने उन्हें अन्य पड़ पर नियुक्त किया था।

मिल सकती है सेवावृद्धि

2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा है कि सरकार ने उनके कार्यकाल में वर्द्धि कर सकती है। वीरा राणा मार्च में सेवानिवृत्त हो जायेंगी और चुनावी आचार संहिता के सरकार नहीं चाहेगी की मुख्य सचिव की नियुक्ति के गेंद चुनाव आयोग के हाथ में चली जाए ऐसे में सरकार उन्हें फरवरी के अंत तक उनका सेवावृद्धि का आदेश जारी कर सकती है।

मध्य प्रदेश के सीनियर आईएएस को हो सकती है सज़ा, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

साल 2012 में, भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी मामले से संबंधी अवमानना याचिका में प्रदेश सरकार के एसीएस मोहम्मद सुलेमान सहित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के अमर कुमार सिन्हा तथा विजय कुमार विश्वकर्मा को अवमानना का दोषी करार दिया था। सरकार की ओर से उक्त आदेश वापस लेने आवेदन प्रस्तुत किया गया था। प्रशासनिक न्यायाधीश शीलू नागू व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।

मानिटरिंग कमेटी गठित करने के दिये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मानिटरिंग कमेटी को गठित करने के निर्देश भी जारी किए। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी उक्त अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी।

युगलपीठ ने उक्त तीनों अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया था। सरकार की तरफ से उक्त आदेश वापस लेने का आग्रह किया गया। आवेदन में कहा गया कि न्यायालय के आदेश का परिपालन करने पूरे प्रयास किए जा रहे है। मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा के परिपालन के लिए समयबद्ध कार्यक्रम निर्धारित किया जा सकता है। मॉनिटरिंग कमेटी इस संबंध में संबंधित विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित कर सकती है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदन पर फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए।