Sat. Apr 13th, 2024

आचार संहिता के बाद एक्शन में Police, प्रदेश में अब तक 18 करोड़ की अवैध शराब और 6 करोड़ की नगदी जब्त की

लोकसभा चुनावों के आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से प्रशासन और Police की मुस्तैदी के चलते प्रदेश में 6 करोड़ से ज्यादा की नगदी, 18 करोड़ की अवैध शराब बरामद की है। दो लाख 60 हजार 74 लाइसेंसी शस्त्र थानों में जमा कराए गए हैं। यह कारवाई Police ने चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद की है।

Police ने 6 करोड़ से ज्यादा के नगदी जब्त

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया है कि आचार संहिता के प्रभावशील होने के बाद Police एवं अन्य जांच एजेंसियों द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। दो अप्रैल 2024 तक छह करोड़ 58 लाख 53 हजार 49 रुपये की ऐसे नकदी जब्त की गई है, जिसका ब्योरा नगदी के साथ पकड़ाया व्यक्ति नहीं दे पाया।

आचार संहिता के बाद एक्शन में Police

11 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की आबकारी ने

11 लाख 32 हजार 859 लीटर अवैध शराब जब्त की गई, जिसका मूल्य 17 करोड़ 95 लाख 55 हजार 629 रुपये होता है। इसी तरह 14 करोड़ 34 लाख 35 हजार 955 रुपये मूल्य के 10 हजार 285 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स और तीन करोड़ 92 लाख 71 हजार 21 रुपये मूल्य की 199 किलोग्राम से अधिक कीमती धातुएं भी जब्त की गई हैं। इसके अलावा 20 करोड़ 69 लाख 650 रुपये मूल्य की अन्य सामग्री भी जब्त की गई हैं।

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाने वाले सुरेश पचोरी ने क्यों छोड़ा अपनी पार्टी का दामन ? जानिए बीजेपी में शामिल होने की बड़ी वजहें?

आगामी चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। एक के बाद एक कांग्रेस के कई नेताओं ने आज बीजेपी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस के सुरेश पचौरी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है।नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे।

कांग्रेस को फिर से झटका

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की मध्यप्रदेश से विदाई के तीसरे दिन कांग्रेस को फिर से एक बड़ा झटका लगा। दरअसल शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने भाजपा का दामन थाम लिया। साथ ही प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और धार के पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पिछले विधानसभा में इंदौर से कांग्रेस के इकलौते विधायक रहे संजय शुक्ला, पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पलिया, सतपाल पलिया और भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

कांग्रेस छोड़ने की क्या वजहें?

सुरेश पचौरी के नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे। यही कारण था कि हाल ही में जब राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा मध्यप्रदेश आई, तो वे उसमें शामिल नहीं हुए। इस दौरान उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने और बात करने तक नहीं गया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान उनके समर्थकों को नजरअंदाज किया गया। इससे भी वे नाराज चल रहे थे। वहीं, धार क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है।

भाजपा में शामिल होने के बाद क्या कहा?

भाजपा में शामिल होने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा, भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन रहा, तो कांग्रेस ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर इसे ठुकरा दिया। मुझे आघात पहुंचा। कांग्रेस को निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता नहीं थी। पचौरी ने कहा कि मैं स्वामी शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का शिष्य हूं। तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने भेजा कि शंकराचार्य जी से पूछकर आओ कि क्या करना है? उन्होंने कहा कि अयोध्या में शिलान्यास हो और मंदिर बने। फिर हम तत्कालीन गृह मंत्री के साथ गए और वहां शिलान्यास किया। वहां अशोक सिंघल भी थे। फिर अब निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता कहां से पड़ गई। राम मंदिर का ताला खोलना, शिलान्यास होना किस कार्यकाल में हुआ ये बोला जा सकता था।

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाते हैं पचोरी

मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि भाजपा में पूर्व सीएम कैलाश जोशी को ‘राजनीति का संत’ कहा जाता था। कांग्रेस की राजनीति में यह पदवी सुरेश पचौरी को मिली है। ऐसे व्यक्ति का कांग्रेस में स्थान नहीं है, इसलिए उनको लगा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जाकर कुछ काम करने की जरूरत है। इसलिए आज वह भाजपा में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और 1984 में राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। वह 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 1990, 1996 और 2002 में फिर से चुने गए।

एक केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने रक्षा, कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत और पेंशन और संसदीय मामले और पार्टी के जमीनी स्तर के संगठन कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे। पचौरी ने अपने राजनीतिक करियर में केवल दो बार चुनाव लड़ा। साल 1999 में, उन्होंने भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की उमा भारती को चुनौती दी और 1.6 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। इसके अलावा उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर से शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और दिवंगत सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

तीन दशक के बाद एमपी को मिली महिला मुख्य सचिव, जानिए कौन है नई मुख्य सचिव वीरा राणा

मध्यप्रदेश सरकार ने 1988 बेच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वीरा राणा को मध्यप्रदेश का मुख्य सचिव पद नियुक्त कर दिया है वे इस पद को मार्च 2024 तक सम्भालेंगी। राणा अब तक मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थी। इस पद पर निर्मला बुच के बाद वे दूसरी महिला होंगी। दो बार के कार्यकाल के विस्तार के बाद इक़बाल सिंह बैस 30 नवंबर 2023 के सेवानिवृत्त हो गए थे। जिसके बाद चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण वीरा राणा को अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया था।

पहली बार हुआ ऐसा?

मध्यप्रदेश के गठन के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि मतदान के दिन अलग चीफ सेक्रेटरी था और मतगणना के दिन अलग। वोटिंग के दिन इक़बाल सिंह बैस और 3 दिसम्बर को राणा ने प्रदेश के मुख्य सचिव पद कि कमान संभाल ली थी।

किन पदों पर रहा चुकी हैं

मुख्य सचिव बनने से पहले मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष, राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी, खेल और युवा कल्याण विभाग की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रशासन अकादमी में महानिदेशक, कुटीर और ग्रामोद्योग विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण विभागों के साथ मध्यप्रदेश के दो जिले जबलपुर और विदिशा जिले की कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन से रहा विवादों का नाता

2018 में तत्कालीन मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सरकार से अपने पीएस पद के के लिए एक महिला आईएएस की अनुसंशा की थी और वर्तमान सरकार ने वीरा राणा को इस पद पर नियुक्त कर दिया था। एक पखवाड़े काम करने के बाद ही उनकी राज्यपाल कॉफ़ी टेबल के प्रकाशन को लेकर अनबन हो गई थी जिसके बाद वे चाइल्ड केयर लीव पर चली गई थी जिसके बाद सरकार ने उन्हें अन्य पड़ पर नियुक्त किया था।

मिल सकती है सेवावृद्धि

2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा माना जा रहा है कि सरकार ने उनके कार्यकाल में वर्द्धि कर सकती है। वीरा राणा मार्च में सेवानिवृत्त हो जायेंगी और चुनावी आचार संहिता के सरकार नहीं चाहेगी की मुख्य सचिव की नियुक्ति के गेंद चुनाव आयोग के हाथ में चली जाए ऐसे में सरकार उन्हें फरवरी के अंत तक उनका सेवावृद्धि का आदेश जारी कर सकती है।