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EDUCATION UPDATE : मप्र के स्कूल के गेस्ट टीचर्स के लिए आयी बड़ी खुखुशखबरी, जल्द ही होगी 75 हजार गेस्ट टीचर्स की भर्ती

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले गेस्ट टीचर्स अपने परमानेन्ट होने की मांगो को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। गेस्ट टीचर्स की स्थति को लेकर सागर विधानसभा से बीजेपी के विधायक शैलेंद्र जैन ने प्रश्न उठाया था। इस पर स्कूली शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जवाब देते हुए कहा की इस प्रकरण को लेकर हम कार्यवाही करेंगे।

विधायक ने पूछा सवाल

सागर से चौथी बार बने विधायक शैलेंद्र जैन ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से पूछा की प्रदेश के गेस्ट टीचर्सों के नियमितीकरण के संबंध में शासकीय स्कूलों में कितने गेस्ट टीचर्स अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आप उनकों कितनी सैलरी दे रहे हैं। क्या गेस्ट टीचर्स के द्वारा की जा रही मेहनत का परिणाम बच्चों में देखने को मिल रहा है?

शैलेंद्र जैन का पूछना है की इतने वर्ष से जो शिक्षक कार्य कर रहे है, और इतने लंबे समय से नियमितीकरण हेतु 12 माह, 62 वर्ष की आयु तक का कार्यकाल और परिश्रम के हिसाब से पैसे मिलते है, तो क्या गेस्ट टीचर्सों को नियमित करे जाने के लिए कोई योजनाएं हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री का जवाब

उदय प्रताप सिंह जवाब देते हुए बोले की वर्तमान में शासकीय स्कूलों में गेस्ट की संख्या लगभग 72526 हैं औऱ वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभागीय आदेश दिनांक 29.09.2023 अनुसार गेस्ट टीचर्स वर्ग 1 को 18 हजार रुपए, गेस्ट टीचर्स वर्ग 2 को 14 हजार रुपए और गेस्ट टीचर्स वर्ग 3 को 10 हजार मासिक मानदेय की स्वीकृति प्रदान की गई है। गेस्ट टीचर्सों के लिये नियमित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है और नियमितीकरण की नीति बनाने की कार्यवाही प्रचलन में है.

घर में किया जा रहा स्कूल संचालित ना प्लेग्राउंड ना पार्किंग, किसी अधिकारी का ध्यान भी नहीं

बड़नगर। स्थानीय डायवर्सन रोड़ पर लोटस कॉन्वेंट स्कूल 2022 से संचालित किया जा रहा है, जिसमें नर्सरी से सातवीं कक्षा तक लगभग 430 बच्चे शिक्षा का अध्ययन कर रहे हैं व 22 शिक्षक अपनी सेवाए दे रहे हैं उक्त स्कूल में बच्चों को लाने छोड़ने के लिए वाहन भी है, परंतु स्कूल में बच्चों के खेलने कूदने के लिए कोई प्लेग्राउंड ही नहीं है व पेरेंट्स के आने जाने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है।

घर की तरह लगता है स्कूल

उक्त स्कूल को अगर आप प्रायः ही देखेंगे तो यह स्कूल तो बिल्कुल ही नहीं दिखेगा क्योंकि जिस जगह यह स्कूल संचालित हो रहा है वह तो किसी घर की तरह लगता है। अब मजे की बात यह है कि स्कूल में कोई प्लेग्राउंड नहीं है तो बच्चे स्पोर्ट्स में कैसे आगे बढ़ेंगे ? दिनभर पढ़ाई करके अपना माइंड फ्रेश कैसे करेंगे नए दोस्तों से कैसे मिलेंगे व अपनी चर्चाओं का एक दूसरे से आदान प्रदान केसे करेंगे हम इन 430 बच्चों के लिए उक्त स्कूल के संचालक महोदय से पूछना चाहते हैं कि क्या पढ़ाई ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है शारीरिक फिटनेस का कोई महत्व नहीं है।

अधिकारीगण भी ध्यान नहीं दे रहे

खैर बात इतनी ही नहीं है यह स्कूल संचालित जब से हुआ तब से संबंधित अधिकारी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया, ना हीं उक्त स्कूल के डायरेक्टर से प्लेग्राउंड और पार्किंग के बारे में पूछा और ना ही देखने गए क्या उक्त स्कूल की जानकारी को संज्ञान में लाकर संबंधित अधिकारीगण उक्त स्कूल का रजिस्ट्रेशन रद्द कर व उक्त स्कूल की जांच सही से न करने वाले अधिकारी की जांच कर बर्खास्त करेंगे या अपनी आंखों पर उक्त स्कूल के सामने से निकलते समय पट्टी बांधकर इसी तरह से नजर अंदाज करते रहेंगे ।
स्मरण रहे कि ऐसे और भी कई स्कूल है जहा पर यह उपरोक्त लिखी गई समस्याएं अपने हाथ बांधे जस की तस खड़ी हुई है क्या उन स्कूलों पर भी लगाम कसी जाएगी या छोटे छोटे से छात्र छात्राओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता रहेगा।