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MP में एक बार फिर हुई डिजिटली अरेस्ट से ठगी, व्हाट्सएप कॉल के जरिये डिजिटली अरेस्ट कर ठगे 2 करोड़ 40 लाख

Ujjain: इंदौर (Indore) में हुई डिजिटली गुत्थी सुलझी भी नहीं थी वैसा ही ठगी का मामला उज्जैन (ujjain) से सामने आया है। शहर के स्टील व्यापारी को व्हाट्सएप के जरिए कॉल करके डिजिटली अरेस्ट कर 2 करोड़ की ठगी की है। धोखेबाजों ने ठगी की रकम को 40 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। व्यापारी ने जब माधवनगर थाने में शिकायत की तो पुलिस भी दंग रह गई।।

जेट एयरवेज के मालिक तक जुड़े तार

ठगों ने व्यापारी को फ़ोन कर बताया कि जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के द्वारा किये गए फ़्रॉड का पैसा आपके एकाउंट में आया है। आरोपियों ने सीबीआई के लेटर हेड भी भेजे ताकि व्यापारी को विश्वास हो सके, जिसके बाद व्यापारी घबरा गया और उसने ठगों के कह अनुसार 2 करोड़ की राशि उनके एकाउंट में ट्रांसफर कर दी।

घटना के 4 दिन बाद समझ आया कि ठगी हुई

घटना के 4 दिन बाद स्टील व्यापारी को आभास हो गया की उनके साथ ठगी हुई है तो उन्होंने तत्काल माधवनगर थाना पहुंचकर पुलिस को शिकायत की। सनसनीखेज ठगी का मामला सामने आते ही एसपी प्रदीप शर्मा ने सीएसपी दीपिका शिंदे के नेतृत्व में सायबर सेल और क्राईम ब्रांच के साथ मिलकर 5 टीमें बनाई गईं।

सभी ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए और व्हाट्सएप कॉलिंग के साथ जिस बैंक खाते में रुपए ट्रांसफर किए गए उनकी जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस की टीम यूपी और बिहार पहुंची, जहां पर बैंक शाखा में जाकर जिस खाते में रुपए गए थे। उसकी जानकारी निकाली तो पुलिस अधिकारी भी दंग रहे गए। उक्त 2 करोड़ रुपए 40 खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे।

इनको किया गिरफ्तार

पुलिस ने मुकेश पिता रामचंद्र सॉ 35 साल निवासी ग्राम भैंसासुर नालंदा बिहार, अमरेन्द्र कुमार पिता ब्रजनंदन प्रसाद 23 साल निवासी ग्राम बारापुर नालंदा बिहार, अनिल पिता भेरुसिंह यादव 31 साल निवासी नवादा मैनपुरी यूपी, शरद पांडे पिता अमोद पांडे 30 साल निवासी ग्राम कुशमरा मैनपुरी और शाहनवाज पिता मुन्ना आलम 18 साल निवासी ग्राम किंजर अरबल बिहार को गिरफ्तार किया।

Digital Arrest कर इंदौर के डॉक्टर दम्पत्ति से ठगे 8 लाख, जानिए क्या है Digital Arrest, कैसे करते हैं इस तरह का फ्रॉड

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) नई और बेहद हाईटेक ऑनलाइन ठगी का मामला इंदौर क्राइम ब्रांच (Crime Branch) में दर्ज हुआ है। इंदौर के राजेन्द्र नगर निवासी डॉक्टर दम्पति को ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए 53 घंटे डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) कर के रखा और बाद 8 लाख 36 हज़ार अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए।

मुंबई CBI की स्काइप आईडी से आया था कॉल

डॉक्टर दम्पति ने बताया कि उन्हें मुम्बई सीबीआई स्काईप आईडी से वीडियो कॉल आई थी। कॉल पर ठगों ने कस्टम अधिकारी बताया और कहा कि इंटरनेशनल कुरियर कम्पनी के लिए पार्सल डिलीवर हुआ है। जिसमे एक लेपटॉप, 40 किलो कपड़े और एमडी एमए ड्रग जब्त हुई। फेक अधिकारी ने कहा कि इस डिलीवरी और कंपनी के जिस खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं उसमें आपके आधारकार्ड और अन्य आईडी का प्रयोग हुआ है।

53 घंटे तक Digital Arrest रखा

ठगों ने कहा कि अभी आपके बयान लिए जाएंगे तो हमारे अधिकारी आपको एक वीडियो कॉल करेंगे जहाँ आपको अपने बयान दर्ज कराने होंगे। वीडियो कॉल वर्दी में ल सीबीआई अधिकारी और अन्य ऑफिसर दिखे जहाँ उन्होंने अलग अलग धाराओं में फ़साने को लेकर डराया। इसके बाद आरबीआई से एक कॉल आया तो डॉक्टर दम्पत्ति ने ठगों के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए।

क्या होता है Digital Arrest?

कानूनी तौर पर Digital Arrest नाम का कोई शब्द नहीं है। यह एक फ्रॉड करने का तरीका है,जो साइबर ठग अपनाते हैं। इसका सीधा मतलब होता है ब्लैकमेलिंग, जिसके जरिए ठग अपने टारगेट को ब्लैकमेल करता है। डिजिटल अरेस्ट में कोई आपको वीडियो कॉलिंग के जरिए घर में बंधक बना लेता है। वह आप पर हर वक्त नजर रख रहा होता है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग कोई सरकारी एजेंसी के अफसर या पुलिस अफसर बनकर आपको वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद ठग आपको कहते हैं कि आपका आधार कार्ड सिम कार्ड या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए हुआ। वह आपको फर्जी गिरफ्तारी का डर दिखाकर घर में ही कैद कर देते हैं। इसके बाद वह झूठे आरोप लगाते हैं और जमानत की बातें कह कर पैसे ऐंठ लेते हैं। अपराधी इस दौरान आपको वीडियो कॉल से हटने भी नहीं देते हैं और ना ही किसी को कॉल करने देते हैं। डिजिटल अरेस्ट के इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।

साइबर ठगों को ट्रेस करना बहुत कठिन

हजारों किलोमीटर दूर बैठकर साइबर ठग आपको अपना शिकार बना लेते हैं। स्काइप आईडी, वीचैट और उन वीडियो कॉलिंग से आपसे संपर्क करते हैं ऐसे में पुलिस को 3 से 6 महीने तो आरोपियों का डाटा, यूआरएल जानकारी लेने के लिए समय लग जाता है। अधिकतर एप्लीकेशन्स के सर्वर विदेश में हैं, जहां से जानकारी जुटाने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करना पड़ती है और कई महीनों तक जानकारी नहीं मिल पाती।