Wed. Jul 17th, 2024

Digital Arrest कर इंदौर के डॉक्टर दम्पत्ति से ठगे 8 लाख, जानिए क्या है Digital Arrest, कैसे करते हैं इस तरह का फ्रॉड

मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) नई और बेहद हाईटेक ऑनलाइन ठगी का मामला इंदौर क्राइम ब्रांच (Crime Branch) में दर्ज हुआ है। इंदौर के राजेन्द्र नगर निवासी डॉक्टर दम्पति को ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए 53 घंटे डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) कर के रखा और बाद 8 लाख 36 हज़ार अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए।

मुंबई CBI की स्काइप आईडी से आया था कॉल

डॉक्टर दम्पति ने बताया कि उन्हें मुम्बई सीबीआई स्काईप आईडी से वीडियो कॉल आई थी। कॉल पर ठगों ने कस्टम अधिकारी बताया और कहा कि इंटरनेशनल कुरियर कम्पनी के लिए पार्सल डिलीवर हुआ है। जिसमे एक लेपटॉप, 40 किलो कपड़े और एमडी एमए ड्रग जब्त हुई। फेक अधिकारी ने कहा कि इस डिलीवरी और कंपनी के जिस खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं उसमें आपके आधारकार्ड और अन्य आईडी का प्रयोग हुआ है।

53 घंटे तक Digital Arrest रखा

ठगों ने कहा कि अभी आपके बयान लिए जाएंगे तो हमारे अधिकारी आपको एक वीडियो कॉल करेंगे जहाँ आपको अपने बयान दर्ज कराने होंगे। वीडियो कॉल वर्दी में ल सीबीआई अधिकारी और अन्य ऑफिसर दिखे जहाँ उन्होंने अलग अलग धाराओं में फ़साने को लेकर डराया। इसके बाद आरबीआई से एक कॉल आया तो डॉक्टर दम्पत्ति ने ठगों के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए।

क्या होता है Digital Arrest?

कानूनी तौर पर Digital Arrest नाम का कोई शब्द नहीं है। यह एक फ्रॉड करने का तरीका है,जो साइबर ठग अपनाते हैं। इसका सीधा मतलब होता है ब्लैकमेलिंग, जिसके जरिए ठग अपने टारगेट को ब्लैकमेल करता है। डिजिटल अरेस्ट में कोई आपको वीडियो कॉलिंग के जरिए घर में बंधक बना लेता है। वह आप पर हर वक्त नजर रख रहा होता है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग कोई सरकारी एजेंसी के अफसर या पुलिस अफसर बनकर आपको वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद ठग आपको कहते हैं कि आपका आधार कार्ड सिम कार्ड या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए हुआ। वह आपको फर्जी गिरफ्तारी का डर दिखाकर घर में ही कैद कर देते हैं। इसके बाद वह झूठे आरोप लगाते हैं और जमानत की बातें कह कर पैसे ऐंठ लेते हैं। अपराधी इस दौरान आपको वीडियो कॉल से हटने भी नहीं देते हैं और ना ही किसी को कॉल करने देते हैं। डिजिटल अरेस्ट के इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।

साइबर ठगों को ट्रेस करना बहुत कठिन

हजारों किलोमीटर दूर बैठकर साइबर ठग आपको अपना शिकार बना लेते हैं। स्काइप आईडी, वीचैट और उन वीडियो कॉलिंग से आपसे संपर्क करते हैं ऐसे में पुलिस को 3 से 6 महीने तो आरोपियों का डाटा, यूआरएल जानकारी लेने के लिए समय लग जाता है। अधिकतर एप्लीकेशन्स के सर्वर विदेश में हैं, जहां से जानकारी जुटाने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करना पड़ती है और कई महीनों तक जानकारी नहीं मिल पाती।

अगर आप भी एप से लोन लेते है तो यह खबर जरूर पढें – फर्जी एप लोन के चक्कर में पुलिसकर्मी को चुकाने पड़े 14 लाख, Cyber Crime ने किया मामले का खुलासा

Bhopal: साइबर क्राइम ब्रांच ने बुधवार को फर्जी लोन एप मामले में मुंबई के कॉल सेंटर से तीन जालसाजों को पकड़ा है। पकड़े गए आरोपियों ने भोपाल के एक पुलिसकर्मी को ब्लैकमेल किया था, जो उनके एक ऑनलाइन ऐप से 50,000 रुपये का लोन लेने के बाद उनके जाल में फंस गया और 14 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा।

पीड़ित की फोटो से छेड़छाड़ कर रिस्तेदारों को भेजे

आरोपी ने पीड़ित को ब्लैकमेल कर और धमकी देकर पैसे वसूले। उन्होंने पीड़ित की तस्वीरों से छेड़छाड़ की और उससे पैसे ऐंठने के लिए उसे उसके दोस्तों और रिश्तेदारों को भेज दिया। उन्होंने कर्ज वसूलने के लिए पीड़ित को धमकी भरे फोन किए। उन्होंने उसके दोस्तों और परिवार को उसका आधार कार्ड भी भेजा और यह कहकर उनसे पैसे ऐंठे कि उन्होंने पीड़ित का अपहरण कर लिया है।

डीसीपी ने किया खुलासा

डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि इस मामले की शिकायत जवाहर चौक निवासी सुबोध नामक व्यक्ति ने की थी। सुबोध ने पुलिस को बताया कि उन्होंने एक आनलाइन कंपनी से 50 हजार रुपये का लोन लिया था। कंपनी वालों ने ब्याज की चालीस प्रतिशत रकम काटकर उन्हें 30 हजार रुपए दिए। लोन लेने के पांच दिन बाद ही कंपनी वाले पैसा लौटाने के लिए दबाव बनाने लगे। वह लोन के बदले करीब 14 लाख रुपये का भुगतान कर चुके हैं, लेकिन कंपनी वाले और पैसों की मांग कर रहे हैं।

इस मामले में सायबर क्राइम ब्रांच ने शिकायत के आधार पर आनलाइन ऐप कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ धारा 386, 387, 507, 306, 109, 511, 120बी भादवि के तहत केस दर्ज किया था।