Wed. Apr 24th, 2024

रमज़ान का यह महीना बरकतों व इबादतों का है, इस महीने में होते है 3 अशरे

यह महिना मुसलमानो के लिए बहुत खास होता है, यह मान्यता है कि रमजान–उल–मुबारिक मुस्लिम धर्मानुलंबियों के लिए अल्लाह की तरफ से एक इनाम व इकराम है जिसने इसे पा लिया उसे मिल गया और जिसने ना पाया वह रह गया। इस माह के चांद दिखने के बाद से हि इबादतों, नमाजों, तरावीह व तस्बियों का दौर लगातार सभी मस्जिदों में जारी है, तो वहीं हर मुसलमान समाज के बच्चे व बड़े मस्तुराते मशक्कत के साथ रोजे रख रहे हैं। जिसमें सहरी व इफ्तार की दावते भी जगह-जगह देखने को मिल रही हैं। रमज़ान महीना 3 अशरो में विभाजित होता है, जिनकी मान्यता कुछ इस प्रकार से है –

  1. पहला अशरा – रहमत का (उस रब की बारगाह–ए–करीमी में आंसुओं के चिरागों से उजाला और उसकी रहमत पुकारने के लिए)
  2. दूसरा अशरा – मगफिरत का (मगफिरत की जुस्तजू में और तलब में मसरूफ होने के लिए)
  3. तीसरा अशरा – जहन्नम से आज़ादी के लिए (जहन्नम से आजादी का परवाना लेने के लिए बिन पानी मछली की तरह तड़पने के लिए)

याद रहे की एक अशरा 10 रोज़ों का होता है, ऐसे 3 अशरे 30 दिनों के होते हैं। इन दिनों में सभी मुसलमान पांचों वक्त की नमाज़ पाबंदी के साथ पढ़ते है, वहीं पूरे दिन का रोज़ा भी रखते है, रमजान महीने के आखरी अशरे में 5 रातें जागी जाति है जिनमे पूरी रात ईश्वर की इबादत व रियाज़त की जाती है। इस माह की यह मान्यता भी है की इसमें एक नेकी करने पर 70 नेकियों के बराबर सवाब (पुण्य) प्राप्त होता है।

महिलाओं की साड़ी वॉकथॉन शुरू होते ही हुई खत्म, महिलाओं की जगह सीएम खुद झंडा लेकर भागे

गुरुवार को इंदौर के नेहरू स्टेडियम में आयोजित साड़ी वॉकथॉन में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला। इस वॉकथॉन में 25 हजार महिलाओं के शामिल होने का दावा किया गया लेकिन स्टेडियम पहुंची महज 5-6 हजार महिलाएं और जब वॉकथॉन शुरू हुई उस समय महज 150-200 महिलाएं ही शेष रह गई। जिसके कारण सीएम ने वॉकथॉन को झंडी दिखाकर खुद ही झंडी लेकर दौड़ना शुरू कर दिया। इसी के साथ यह वॉकथॉन शुरू होते ही समाप्त भी हो गई। आईये जानते है इसके बारे में विस्तार से।

लगभग 1.5 किमी की वॉकथॉन होनी थी

इंदौर की महिलाओं की साड़ी वॉकथॉन लगभग 2 किमी की होनी थी। इसकी शुरुआत नेहरू स्टेडियम से ही होनी थी। जिसके बाद यह वॉकथॉन रेडीडेंसी और जीपीओ होते हुए नेहरू स्टेडियम पर ही समाप्त होनी थी, लेकिन महिलाएँ सीएम के देर से आने के कारण कार्यक्रम से चली गई।
जब सीएम वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाने स्टेडियम पहुंचे तब तक स्टेडियम में महज 150-200 महिलाए ही शेष रह गई। इस वजह से सीएम ने खुद वॉकथॉन को झंडी दिखाई और फिर वें खुद ही उस झंडी को लेकर स्टेडियम के गेट नंबर 4 से होते हुए स्टेडियम के अंदर आ गए। इस दौरान एक महिला गिर भी गई। हालांकि महिला को गंभीर चोट नहीं आयी और इस तरह से यह वॉकथॉन समाप्त हुई।

साड़ी वॉकथॉन कुछ महिलाओं के लिए बनी जिंदगी का सबसे बुरी वॉकथॉन, कोई माँ अपने बच्चे से बिछड़ी तो कोई अपने दूधमुंही बच्चे को लेकर परेशान होती रही

इंदौर में गुरुवार को शहर की महिलाएं बड़े जोश और उत्साह के साथ साड़ी वॉकथॉन में शामिल होने के लिए पहुंची थी। वें इस वॉकथॉन में अपनी जिंदगी की सबसे अच्छी यादें बनाने गई थी लेकिन प्रशासन और निगम अधिकारियों के कारण महिलाएँ वहां से अपने जीवन की सबसे बुरी यादें लेकर आयी है। जहां कोई महिला अपने बच्चे से बिछड़ गई तो कोई महिला अपने दूधमुंही बच्चे को साथ लेकर घंटो परेशान होती रही। लेकिन इन सबके बावजूद घंटों गेट नहीं खोला गया। आईये जानते है ऐसा क्या हुआ उनके साथ वॉकथॉन में।

महिलाओं को रोकने के लिए स्टेडियम के दरवाज़े किए बंद

दरअसल नेहरू स्टेडियम में साड़ी वॉकथॉन के लिए 25 हजार महिलाओं को एकत्रित करने का दावा किया गया था। लेकिन 25 हजार तो नहीं 5 हजार महिलाएं जरूर वॉकथॉन में शामिल होने के लिए पंहुच गई।इस वॉकथॉन की शुरुआत शाम 4:30 बजे से होनी थी लेकिन उत्साहीत महिलाएं दोपहर 2 बजे से ही नेहरू स्टेडियम पहुंच गई थी। इन महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महिलाओं को उम्मीद थी कि वें 6-6:30 बजे तक फ्री होकर घर रवाना हो जाएंगी। लेकिन हुआ बिल्कुल इसके विपरीत।
कायर्क्रम 6-6:30 बजे तक चलता ही रहा और सीएम के आने का आश्वासन दिया गया। लेकिन सीएम नहीं पहुंचे जिसके कारण महिलाओं का सब्र टूटता गया और वें कार्यक्रम से रवाना होना शुरू हो गई। देखते-देखते पूरा स्टेडियम खाली हो गया। इसी को रोकने के लिए प्रशासन और निगम अधिकारियों ने गेट के दरवाजे लगा दिए। जिसके कारण कई महिलाएं गेट के अंदर और कुछ महिलाएँ गेट के बाहर चली गई।

महिला अपने दूधमूही बच्चे के साथ गेट के अंदर फंस गई

इस दौरान सुष्मिता बाई अपने 5 साल के बच्चे से बिछड़ गई। जिसके कारण महिला की हालत काफी खराब हो गई, तो वहीं एक महिला अपने दूधमूही बच्चे के साथ गेट के अंदर फंस गई। जिसके कारण महिला का बच्चा काफी देर तक रोता रहा। इस दौरान कई महिलाओं ने नारेबाजी भी की और ताला तोडन की कोशिश भी की।
इस दौरान महिलाओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि व्यवस्था नहीं है तो बुलाया क्यों और 4 घंटे लेट कार्यक्रम कौन शुरू करता है। यदि सीएम लेट आएंगे और हम यहां रूक जाएंगे तो हमारे घर पर खाना कौन बनाएगा। वही सावित्री बाई नाम की महिला ने बताया कि हम हमारे बच्चों को छोड़कर यहां आएहै, अब हम क्या करें यहां।

इंदौर की साड़ी वॉकथॉन में हुआ बड़ा खेला, 5 हजार महिलाओं को 40 हजार बताकर दर्ज कराया झूठा विश्व रिकॉर्ड

इंदौर। वीमेंस डे के एक दिन पहले इंदौर के नेहरू स्टेडियम में शहर की महिलाओं के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश की सरकार के द्वारा साड़ी वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इस वॉकथॉन में 25 हजार महिलाओं के पहुंचने का दावा किया गया था लेकिन इस वॉकथॉन में शामिल होने के लिए 5 हजार महिलाएं पहुंची। वें वॉकथॉन शुरू होने के पहले ही समोराह से चली गई। वॉकथॉन शुरू होने तक मुश्किल से 200 महिलाएं बची। लेकिन इन सबके बावजूद इंदौर ने बड़ा खेला कर 40 हजार महिलाओं का साड़ी वॉकथॉन का रिकॉर्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराया। आईये जानते है इस पूरे खेला के बारे।

सीएम के आने तक 200 महिलाएं बची

दरअसल महिला वॉकथॉन का समय शाम 4.30 बजे का रखा गया था। शहर की काफी महिलाएं भी पहुँची। समोराह की शुरुआत भी हो गई। शाम के 6 बजे तक नेहरू स्टेडियम में 5000 हजार से ज्यादा महिलाएं पहुंच गई। इसी समय सीएम का आने का समय था लेकिन सीएम शहडोल में उल्टी हवा चलने के कारण लेट हो गए।

सीएम का इंतजार करते-करते नेहरू स्टेडियम में से महिलाओं का जाना शुरू हो गया। आखिरकार रात 8:25 पर सीएम नेहरू स्टेडियम पहुंचे। उस समय मुश्किल से 200 महिलाएं बची थी। उनमें भी आम महिलाएं कम थी अधिकांश महिलाएं बीजेपी कार्यकर्ता या पूर्व पार्षद की सहयोगी थी।


सीएम को सौंपा झूठा विश्व रिकॉर्ड

सीएम ने रात 8:40 पर साड़ी वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाई लेकिन उस समय तक केवल 200 महिलाएँ ही बची थी। लेकिन इन सबके बाबजूद सीएम को मंच पर मौजूद विधायक, सांसद और बीजेपी नेताओं के द्वारा 40 हजार से ज्यादा महिलाएँ बताई गई। जबकि इतनी महिलाएं तो पूरे समोराह में नहीं पहुंची। लेकिन फिर भी सीएम को 40 हजार महिलाओं की साडी वॉकथॉन आयोजित करने के लिए वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया। इसी बीच सवाल उठता है कि सरकार और प्रशासन ने ये झूठा खेल क्यों खेला। क्या इंदौर जैसे ऐतिहासिक और जुझारू शहर को ऐसे झूठे अवार्ड की जरूरत है।

इस दौरान सांसद शंकर लालवानी, सांसद कविता पाटीदार,विधायक महेंद्र हार्डिया, विधायक एवं जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलवाट, विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला, बीजेपी नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, निगमायुक्त हर्षिका सिंह मौजूद थे।

पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने दिया राजनीति से इस्तीफ़ा, पीएम मोदी और अमित शाह का धन्यवाद करते हुए, नाड्डा से की ये अपील

पूर्व क्रिकेटर और भारतीय जानता पार्टी के सांसद गौतम गंभीर ने राजनीति से इसीफ़ा दे दिया है, फ़िलहाल गंभीर पूर्वी दिल्ली से BJP सांसद है। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दी है, गंभीर अब क्रिकेट पर ही फोकस करना चाहते है। 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार अरविंदर सिंह लवली को 3,91,222 वोटों से हराकर जीत था लोक सभा चुनाव।

सोशल मीडिया पर की पोस्ट

गंभीर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा, जिस्म उन्होंने लिखा- मैंने माननीय पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से अनुरोध किया है कि वो मुझे मेरे राजनीतिक कर्तव्यों से मुक्त करें ताकि मैं अपनी आगामी क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित कर सकूं।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और ग्रहमंत्री शाह को टैग कृति हुए लिखा कि मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं, मुझे लोगों की सेवा करने का अवसर देने के लिए, धन्यवाद। जय हिन्द।

2016 में खेला था आख़िरी टेस्ट मैच

गौतम गंभीर ने भारत की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच 2016 में राजकोट के स्टेडियम में खेला था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 58 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और 41.95 के एवरेज से 4154 रन बनाए, जिसमें नौ शतक शामिल हैं।

शादी के बाद पति को शारीरिक संबंध नहीं बनाने देती थी पत्नी, पति ने कोर्ट से लिया तलाक का आदेश

भोपाल। मंगलवार को एक प्रकरण में कोर्ट ने आदेश जारी किया। दरअसल मामला भोपाल का है जहां शादी के बाद भी पति को दांपत्य सुख से वंचित रखने के मामले में अपर जिला न्यायाधीश के न्यायालय ने आदेश जारी किया है। मामले में पति की ओर से तलाक के लिए न्यायालय के सामने आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदक की अधिवक्ता ने बताया की 2018 में शादी के बाद से ही पत्नी उसे अपने से दूर रखती थी।दोनों के बीच इस विवाद का मामला परिवार परामर्श केंद्र में भी चला था।

दिव्यांग बोलकर मजाक उड़ाती थी पत्नी

इस मामले में डॉक्टर से भी चेकअप कराया, जिसमे डॉक्टर ने पति को शारीरिक संबंध बनाने के लिए स्वस्थ पाया। पत्नी शारीरिक संबंध नहीं बनाने देती थी और पति का दिव्यांक बोलकर मजाक उड़ाती थी। मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पति को शारीरिक संबंध नहीं बनाने को क्रूरता मानकर पति को तलाक के लिए पात्र मानते हुए तलाक का आदेश दिया।

MP राज्य शिक्षा केंद्र में वाहन घोटाला, फर्जी बिलों पर करोड़ों का पेमेंट

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रायवेट वाहनों को किराए पर लेने के नाम पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगाया है। मप्र कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा, मप्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष जेपी धनोपिया और मप्र कांग्रेस सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने संयुक्त प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य शिक्षा केंद्र से सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में लगे प्राइवेट वाहनों के नाम पर 13 महीनो में करीब 1 करोड़ 75 लाख रुपए का भुगतान श्री ट्रैवल एजेंसी को किया गया है।

मंत्री जी की गाड़ी का नम्बर अलग और मॉडल अलग

मंत्री जी के स्टाफ में अटैच एक अन्य वाहन MP04-BC-7480 नंबर की इनोवा क्रिस्टा दर्ज है। इसकी भी परिवहन विभाग में पड़ताल की गई तो यह स्कॉर्पियो निकली। इस वाहन का 1 अप्रैल 2023 से 30 अप्रैल 2023 तक एक माह का किराया 1,80,628 रुपए चुकाया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम पर एक अन्य आवंटित वाहन इनोवा क्रिस्टा क्रमांक MP04-ZH-5566 के लिए 2 महीने की राशि 3,92,076 रुपए भुगतान की गई। यह वाहन परिवहन विभाग में प्राइवेट कोटे पर दर्ज है।

इसी तरह MP04-CA-9529 नंबर का वाहन राज्य शिक्षा केंद्र में प्रशासन कक्ष को आवंटित है। इसके मालिक को 6 माह में 2,25,057 रुपए का भुगतान किया गया। कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है कि यह वाहन मारुति स्विफ्ट डिजायर बताया गया जबकि परिवहन विभाग में यह मारुति 800 नाम से दर्ज है।

बच्चों के लिए सुविधा नहीं और मंत्री जी कर रहे घोटाले

प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुई कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एक ओर शिक्षा स्तर पूरे प्रदेश में गिर रहा है मंत्री जी उस पर ध्यान ना देकर फेक बिल पास करने के लगे हुए हैं।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने बेटे ‘अकाय’ का किया स्वागत

स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी, बॉलीवुड हस्ती अनुष्का शर्मा ने 20 फरवरी को घोषणा की कि उन्हें एक बच्चे का जन्म हुआ है, जिसका नाम उन्होंने ‘अकाय’ रखा है।

विराट ने इंस्टाग्राम हैंडल पर किया साझा

कोहली द्वारा अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर साझा किए गए नोट के अनुसार, बच्चे को 15 फरवरी को जन्म दिया गया था। यह दंपति की दूसरी संतान है, इसके पहले जनवरी 2021 में, उन्हें एक बेटी हुई जिसका नाम उन्होंने वामिका रखा।

कोहली द्वारा साझा किए गए नोट में कहा गया है, “अत्यधिक खुशी और प्यार से भरे दिल के साथ, हम सभी को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 15 फरवरी को, हमने अपने बच्चे अकाय और वामिका के छोटे भाई का इस दुनिया में स्वागत किया है!”

विशेष रूप से, कोहली ने इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज़ को छोड़ दिया है, जिससे अटकलें लगाई गईं कि वह और अनुष्का अपने दूसरे बच्चे की उम्मीद कर रहे थे।

ऐ.बी.डिविलियर्स ने क्या कहा था

इस महीने की शुरुआत में, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने सुझाव दिया था कि कोहली और अनुष्का दूसरे बच्चे की उम्मीद कर रहे थे , लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी टिप्पणी वापस ले ली।

“…उनका दूसरा बच्चा आने वाला है। हां, यह पारिवारिक समय है और चीजें उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि आप खुद के प्रति सच्चे और सच्चे नहीं हैं, तो आप इस बात का ध्यान नहीं रखते कि आप यहां किसलिए हैं। मुझे लगता है कि ज्यादातर लोगों की प्राथमिकता यही है परिवार। आप इसके लिए विराट को जज नहीं कर सकते। हां, हम उन्हें मिस करते हैं, लेकिन उन्होंने सही फैसला लिया है,” डिविलियर्स ने यूट्यूब पर लाइव सवाल-जवाब सत्र के दौरान कहा।

पूर्व बल्लेबाज ने बाद में एक अखबार से बात करते हुए अपनी टिप्पणी वापस ले ली और कहा कि उन्होंने “भयानक गलती” की है।

घर में किया जा रहा स्कूल संचालित ना प्लेग्राउंड ना पार्किंग, किसी अधिकारी का ध्यान भी नहीं

बड़नगर। स्थानीय डायवर्सन रोड़ पर लोटस कॉन्वेंट स्कूल 2022 से संचालित किया जा रहा है, जिसमें नर्सरी से सातवीं कक्षा तक लगभग 430 बच्चे शिक्षा का अध्ययन कर रहे हैं व 22 शिक्षक अपनी सेवाए दे रहे हैं उक्त स्कूल में बच्चों को लाने छोड़ने के लिए वाहन भी है, परंतु स्कूल में बच्चों के खेलने कूदने के लिए कोई प्लेग्राउंड ही नहीं है व पेरेंट्स के आने जाने वाले वाहनों के लिए पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है।

घर की तरह लगता है स्कूल

उक्त स्कूल को अगर आप प्रायः ही देखेंगे तो यह स्कूल तो बिल्कुल ही नहीं दिखेगा क्योंकि जिस जगह यह स्कूल संचालित हो रहा है वह तो किसी घर की तरह लगता है। अब मजे की बात यह है कि स्कूल में कोई प्लेग्राउंड नहीं है तो बच्चे स्पोर्ट्स में कैसे आगे बढ़ेंगे ? दिनभर पढ़ाई करके अपना माइंड फ्रेश कैसे करेंगे नए दोस्तों से कैसे मिलेंगे व अपनी चर्चाओं का एक दूसरे से आदान प्रदान केसे करेंगे हम इन 430 बच्चों के लिए उक्त स्कूल के संचालक महोदय से पूछना चाहते हैं कि क्या पढ़ाई ही जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है शारीरिक फिटनेस का कोई महत्व नहीं है।

अधिकारीगण भी ध्यान नहीं दे रहे

खैर बात इतनी ही नहीं है यह स्कूल संचालित जब से हुआ तब से संबंधित अधिकारी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया, ना हीं उक्त स्कूल के डायरेक्टर से प्लेग्राउंड और पार्किंग के बारे में पूछा और ना ही देखने गए क्या उक्त स्कूल की जानकारी को संज्ञान में लाकर संबंधित अधिकारीगण उक्त स्कूल का रजिस्ट्रेशन रद्द कर व उक्त स्कूल की जांच सही से न करने वाले अधिकारी की जांच कर बर्खास्त करेंगे या अपनी आंखों पर उक्त स्कूल के सामने से निकलते समय पट्टी बांधकर इसी तरह से नजर अंदाज करते रहेंगे ।
स्मरण रहे कि ऐसे और भी कई स्कूल है जहा पर यह उपरोक्त लिखी गई समस्याएं अपने हाथ बांधे जस की तस खड़ी हुई है क्या उन स्कूलों पर भी लगाम कसी जाएगी या छोटे छोटे से छात्र छात्राओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता रहेगा।