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मप्र व्यापम घोटाले में 11 आरोपितों को सात-सात साल की सजा, 7 लोगों को सूबत के आभाव में हुए बरी

भोपाल । जिला कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (व्यापम प्रकरण) नीतिराज सिंह सिसोदिया ने व्यापम घोटाले के एक मामले की सुनवाई करते हुए 11 आरोपितों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा 14 आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

किसी और बिठाकर दिलवाई थी परीक्षा

सीबीआई के लोक अभियोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि व्यापम द्वारा 30 सितंबर 2012 को मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें छह अभ्यर्थियों लोकेन्द्र कुमार धाकड़, अविनाश जयंत, राजेश प्रजापति, भूरा रावत, राधेश्याम यादव तथा विकास रावत ने अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति (प्रतिरूपक) को परीक्षा में बैठाकर लिखित परीक्षा पास की थी।

अभ्यर्थी लोकेन्द्र कुमार धाकड़ के स्थान पर प्रतिरूपक हेमंत सिंह जाट ने, अविनाश जयंत के स्थान पर कुमार झा, राजेश प्रजापति के स्थान पर अभ्यर्थी के भाई नरेश प्रजापति, भूरा रावत के स्थान पर रामवीर सिंह रावत, राधेश्याम यादव के स्थान पर अज्ञात प्रतिरूपक ने तथा विकाश रावत के स्थान पर प्रतिरूपक हरिओम तोमर ने परीक्षा दी थी।

चार को किया दंडित

परिणाम स्वरूप उक्त छह अभ्यर्थी पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में पास हो गए थे। सोमवार को न्यायालय ने कई गवाहों, दस्तावेजों और आर्टिकल्स के आधार पर छह अभ्यथियों तथा पांच प्रतिरूपकों को भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 सहपठित धारा 120-बी एवं मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 की धारा 3-घ (1) (2) सहपठित धारा चार के अधीन दंडित किया।

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