Tue. Apr 23rd, 2024

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाने वाले सुरेश पचोरी ने क्यों छोड़ा अपनी पार्टी का दामन ? जानिए बीजेपी में शामिल होने की बड़ी वजहें?

आगामी चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। एक के बाद एक कांग्रेस के कई नेताओं ने आज बीजेपी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस के सुरेश पचौरी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है।नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे।

कांग्रेस को फिर से झटका

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की मध्यप्रदेश से विदाई के तीसरे दिन कांग्रेस को फिर से एक बड़ा झटका लगा। दरअसल शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने भाजपा का दामन थाम लिया। साथ ही प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और धार के पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पिछले विधानसभा में इंदौर से कांग्रेस के इकलौते विधायक रहे संजय शुक्ला, पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पलिया, सतपाल पलिया और भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

कांग्रेस छोड़ने की क्या वजहें?

सुरेश पचौरी के नजदीकी लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से हो रही उपेक्षा से वे नाराज चल रहे थे। यही कारण था कि हाल ही में जब राहुल गांधी की भारत न्याय यात्रा मध्यप्रदेश आई, तो वे उसमें शामिल नहीं हुए। इस दौरान उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने और बात करने तक नहीं गया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव के दौरान उनके समर्थकों को नजरअंदाज किया गया। इससे भी वे नाराज चल रहे थे। वहीं, धार क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है।

भाजपा में शामिल होने के बाद क्या कहा?

भाजपा में शामिल होने के बाद सुरेश पचौरी ने कहा, भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन रहा, तो कांग्रेस ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर इसे ठुकरा दिया। मुझे आघात पहुंचा। कांग्रेस को निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता नहीं थी। पचौरी ने कहा कि मैं स्वामी शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का शिष्य हूं। तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने भेजा कि शंकराचार्य जी से पूछकर आओ कि क्या करना है? उन्होंने कहा कि अयोध्या में शिलान्यास हो और मंदिर बने। फिर हम तत्कालीन गृह मंत्री के साथ गए और वहां शिलान्यास किया। वहां अशोक सिंघल भी थे। फिर अब निमंत्रण पत्र अस्वीकार करने की आवश्यकता कहां से पड़ गई। राम मंदिर का ताला खोलना, शिलान्यास होना किस कार्यकाल में हुआ ये बोला जा सकता था।

कांग्रेस की राजनीति के संत माने जाते हैं पचोरी

मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि भाजपा में पूर्व सीएम कैलाश जोशी को ‘राजनीति का संत’ कहा जाता था। कांग्रेस की राजनीति में यह पदवी सुरेश पचौरी को मिली है। ऐसे व्यक्ति का कांग्रेस में स्थान नहीं है, इसलिए उनको लगा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जाकर कुछ काम करने की जरूरत है। इसलिए आज वह भाजपा में शामिल हो रहे हैं। कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और 1984 में राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। वह 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 1990, 1996 और 2002 में फिर से चुने गए।

एक केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने रक्षा, कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत और पेंशन और संसदीय मामले और पार्टी के जमीनी स्तर के संगठन कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे। पचौरी ने अपने राजनीतिक करियर में केवल दो बार चुनाव लड़ा। साल 1999 में, उन्होंने भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की उमा भारती को चुनौती दी और 1.6 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। इसके अलावा उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर से शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और दिवंगत सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

By Srishti Jha

I'm Srishti Jha, a second-year Student pursuing BA in Journalism and Creative Writing Honours at Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication in Bhopal. Passionate about content writing, I have a keen interest in various news genres and enjoy exploring new topics. Excited to contribute my creativity to the world of journalism and content creation.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *