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मध्य प्रदेश के सीनियर आईएएस को हो सकती है सज़ा, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

साल 2012 में, भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी मामले से संबंधी अवमानना याचिका में प्रदेश सरकार के एसीएस मोहम्मद सुलेमान सहित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के अमर कुमार सिन्हा तथा विजय कुमार विश्वकर्मा को अवमानना का दोषी करार दिया था। सरकार की ओर से उक्त आदेश वापस लेने आवेदन प्रस्तुत किया गया था। प्रशासनिक न्यायाधीश शीलू नागू व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने आवेदन पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।

मानिटरिंग कमेटी गठित करने के दिये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते हुए पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मानिटरिंग कमेटी को गठित करने के निर्देश भी जारी किए। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी उक्त अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी।

युगलपीठ ने उक्त तीनों अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया था। सरकार की तरफ से उक्त आदेश वापस लेने का आग्रह किया गया। आवेदन में कहा गया कि न्यायालय के आदेश का परिपालन करने पूरे प्रयास किए जा रहे है। मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा के परिपालन के लिए समयबद्ध कार्यक्रम निर्धारित किया जा सकता है। मॉनिटरिंग कमेटी इस संबंध में संबंधित विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित कर सकती है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदन पर फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए।

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