एचओडी की फटकार ने बदली आश्विन की जिंदगी, इंजीनियर से क्रिकेटर बने आर आश्विन

भारत में हर मां बाप चाहते हैं कि उनका बेटा या बेटी बड़ा होकर इंजीनियर या डाॅक्टर बने लेकिन हर बच्चा इंजिनियरिंग या डाॅक्टर नहीं बनना चाहता है। कुछ बच्चे क्रिकेटर या एक्टर भी बनना चाहते हैं कुछ ऐसी ही कहानी है भारतीय क्रिकेटर आर आश्विन की। जिनके माँ – बाप तो चाहते थे कि वे इंजिनियर बने लेकिन उन्होंने अपने पेशन को फाॅलो किया और इंजिनियरिंग को छोड़कर एक क्रिकेटर बने।

पिता थे तेज गेंदबाज

आर आश्विन का जन्म 17 सितम्बर 1986 को तमिलनाडु के चेन्नई शहर में हुआ था। आश्विन के पिता का नाम रविचंद्रन है। जो साउथ रेलवे कोटा में तेज गेंदबाज थे। जबकि अश्विन की माँ का नाम चित्रा है। आर आश्विन ने अपनी स्कूल की शिक्षा पद्म शेषाद्रि बालभवन से प्राप्त की। लेकिन स्कूल में क्रिकेट और अन्य खेल के पर्याप्त स्त्रोत न होने के कारण उन्होंने स्कूल बदल दिया और शहर के अन्य स्कूल सेंट पाॅल बेद में दाखिला लिया और आगे की शिक्षा ग्रहण की। इस स्कूल से आर आश्विन ने क्रिकेट खेलना भी शुरू किया।

14 साल की उम्र में हुई सर्जरी

आर आश्विन ने कुछ साल तक अपनी स्कूल की टीम के लिए तेज गेंदबाज के तौर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन 14 साल की उम्र में उन्हें बाएं पैर में लिंगामेंट की गंभीर चोट आ गई। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें सर्जरी करानी पड़ी । इसके बाद उनका आगे का क्रिकेट करियर संकट में पड़ गया था। इस सर्जरी के बाद डाॅक्टर ने आश्विन को एक साल बेड रेस्ट करने की सलाह दी। इसके बाद आश्विन ने वापसी तो की लेकिन वे पहले की तरह उस गति दौड़ने में नाकाम रहे हैं।

कोच ने दी स्पिनर बनने की सलाह

इसके बाद आश्विन के स्कूल क्रिकेट कोच ने उन्हें आॅफ स्पिनर बनने की सलाह दी और स्कूल की टीम को एक आॅफ स्पिनर की भी जरूरत थी। इसके बाद आश्विन ने स्पिन गेंदबाजी करना शुरू की और आगे लगातार शानदार प्रदर्शन किया। कुछ समय बाद आश्विन का चुनाव तमिलनाडु की टीम में हो गया। जहाँ उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया।

एचओडी ने परीक्षा के लिए लगाई फटकार

आश्विन क्रिकेट खेलने के साथ-साथ पढ़ाई में भी आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने बी टेक से इंजिनियरिंग करने के लिए SSN कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। आश्विन को काॅलेज के शुरुआती दिनों में तो कोई दिक्कत नहीं आयी लेकिन आखिरी एग्जाम के पहले आश्विन के कुछ असाइंनमेंट आधूरे थे। जिसके कारण उन्हें एग्जाम में बैठने के लिए एचओडी से परमिशन लेना जरूरी था। जिसके लिए आश्विन एचओडी के पास गए।

जहाँ एचओडी ने उन्हें काफी कुछ सुना दिया और कहा कि एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट के तौर पर आप कितने धरातल पर हैं? एक छात्र डिग्री के लिए फील्ड पर भी मेहनत करता है। आप तो सिर्फ क्रिकेट खेलते हैं और खाली टाइम में कॉलेज आ जाते हैं। यह डिग्री हासिल करने के लिए आपने क्या किया है?’ इसके बाद आश्विन ने बड़ी ही विनम्रता से एचओडी से बात की और आगे पढ़ाई पर ध्यान लगाने की बात की। लेकिन आश्विन ने पढ़ाई की वजह की क्रिकेट को ज्यादा गंभीरता से लेना शुरू किया और लगातार आगे बढ़ते रहे।

घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के कारण आईपीएल में मिला मौका

आश्विन तमिलनाडु के लिए लगातार खेलते रहे और अच्छा प्रदर्शन किया। साल 2006-07 में आश्विन ने तमिलनाडु के लिए 20 की औसत से 31 से झटके। इसके बाद आश्विन ने कई और मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। जिसका फल उन्हें 2009 में मिला। जहाँ आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स ने खरीदा। हालांकि उस सीजन में आश्विन को ज्यादा मौका नहीं मिले लेकिन उन्हें दिग्गज क्रिकेटरों से काफी कुछ सीखने को मिला। इसके बाद साल 2010 में आर आश्विन जिम्बाब्वे के खिलाफ भारतीय टीम के लिए सेलेक्शन हुआ और साल 2010 में ही आर आश्विन ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया।

हाल ही में किए 400 विकेट पूरे

आर आश्विन ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आश्विन 2011 वर्ल्ड विजेता भारतीय टीम में भी सदस्य रहे। उसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया और आश्विन ने डेब्यू मैच में ही 5 विकेट चटकाएं। वे ऐसा करने वाले भारत के सातवें गेंदबाज बने। इसके बाद आश्विन ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे और भारतीय क्रिकेट टीम का अहम सदस्य बन गए। हाल ही में आश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में अपने 400 विकेट पूरे किए।

 

 

 

 

 

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